पाँच साल बाद घर आकार चोदा

पाँच साल बाद घर आकार चोदा

सबसे पहले मैं आपको अपने बारे में बता दूँ। मैं 18 साल का एक नया-नया जवान होता लड़का हूँ। मेरा घर भोपाल में है पर मैं दिल्ली में रहता हूँ और यहीं पढ़ाई करता हूँ। मैंने अभी-अभी बारहवीं पास की है। मेरा कद 5'11" है और मेरी बनावट काफ़ी मजबूत है। चेहरा बहुत आकर्षक नहीं है लेकिन अच्छा है।
यह कहानी मेरे पहले सेक्स अनुभव की है जो मैंने इसी साल अप्रैल में अपनी परीक्षा के बाद किया। यह अनुभव मुझे हमेशा याद रहेगा क्योंकि मेरे पहले अनुभव के साथ-साथ यह मेरा बचपन का सपना भी था। तो अब आप लोगों को और पकाना छोड़ के मैं सीधा कहानी पर आता हूँ।
आठवीं से बारहवीं तक पाँच साल मैं लगातार दिल्ली में रहा अपने घर से दूर। बीच में मैं एक बार भी किसी भी छुट्टी में घर नहीं गया। इस साल जब मैं अप्रैल में अपने घर गया तो सोचा अपने बचपन के सबसे प्यारे दोस्त से मिल लूँ। विश्वास मेरा बचपन का दोस्त था जिससे दिल्ली आने के बाद मेरा कोई सम्पर्क नहीं रहा था।\
घर पहुँचने के अगले दिन ही मैं उसके घर गया। जब मैंने दरवाजे की घण्टी बजाई तो दरवाजा उसकी माँ ने खोला।
उसकी माँ - मेरा पहला क्रश।
जब से मैंने होश सम्भाला था तबसे उसकी माँ मुझे दुनिया की सबसे हसीन औरत लगती थीं। उस वक़्त भी उन्हें देख कर मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। आज भी वो किसी कॉलेज गर्ल जैसी खूबसूरत लग रही थीं। शिफ़ौन की लाल रंग की साड़ी, स्लीव्लेस ब्लाउज और चेहरे पर हल्का सा मेकअप। मैं तो उन्हें देखता ही रह गया।
"अरे करन?" उनकी आवाज़ से मेरी तन्द्रा भंग हुई, मैंने उन्हें नमस्ते की।
"अरे तू कब आया रे? पूरे पाँच साल बाद देखा है तुझे। कैसा है तू? चल पहले अन्दर आ।"
और इस से पहले कि मैं मुँह भी खोलता, उन्होंने मेरा हाथ पकड़ के मुझे अन्दर खींच लिया।
वो मुझे खींचती हुई अन्दर ले गई और एक सोफ़े पर धकेल कर बिठा दिया और खुद भी मेरे बगल में बैठ गई। मेरा हाथ उन्होंने अब भी नही छोड़ा था। उस वक़्त मुझे जो अहसास हो रहा था वो मैं बता नही सकता आप सब को।
"अब बोल, कैसा है तू?" आन्टी ने पूछा।
"बस बढ़िया हूँ आन्टी !" मैंने मुस्कुरा कर जवाब दिया।
"पढ़ाई कैसी चल रही है तेरी?"
"अभी बोर्ड दिया है आन्टी, दो महीने बाद रिजल्ट आयेगा तो कॉलेज में एड्मिशन लूँगा।"
फिर मैंने जल्दी से पूछा- आन्टी विशी कहाँ है?
"वो तो इन्दौर में रह रहा है।" आन्टी बोली।
"और अन्कल?"
"वो पुणे गये हैं।" वो बोलीं।
फिर आन्टी ने पूछा- क्यों? मैं बोर कर रही हूँ क्या?
मैं सकपका गया।
"अरे नही आन्टी ऐसा नहीं है !"- मैंने जल्दी से कहा- वो इतने दिनों के बाद आया न इसलिये दोस्त से मिलने आ गया।
"हाँ भई ! दोस्त तो दोस्त है, मुझसे मिलने क्यूँ आयेगा तू?"
"अरे नहीं आन्टी ऐसी बात नहीं है। मैं आपसे भी मिलने आया हूँ।" मैंने कहा।
अब आन्टी ने मेरी आँखों में अपनी आँखें डाल दीं और पूछा- "सच-सच एक बात बता करन ! इतने साल में तुझे मेरी याद आई कभी?"
मेरी साँस अटकने लगी, मैंने धीरे से कहा- हाँ आन्टी, बहुत याद आई आपकी। आपको मेरी याद आई?
आन्टी ने एक गहरी साँस ली और कहा- मेरे दिल की हालत तू नही समझेगा। तू नहीं जानता तेरी याद में मैंने कैसे एक-एक पल काटा है। जैसे कोई प्रेमिका अपने प्रेमी के बिना जी रही हो।
मैं आन्टी की बात सुन कर सन्न रह गया। आन्टी ने यह क्या कह दिया। मुझे लगा कि आन्टी को अब मेरा जवान जिस्म भा गया है। फिर मैंने सोचा कि मेरी बचपन की तमन्ना आज पूरी हो सकती है।
मैंने अपनी सारी हिम्मत जुटाई और कहा- आइ लव यू !
आन्टी के चेहरे पर एक ही पल में कई रंग आये और गये और उन्होंने मेरी तरफ़ से मुँह घुमा लिया और दूसरी तरफ़ देखने लगीं।
मैंने उनके गोरे से गाल पर अपने होंठ रख दिये। अचानक आन्टी पलटीं, मेरा चेहरा अपने दोनों हाथों के बीच में थाम लिया और अपने होंठ मेरे होंठों पे रख दिये।
मुझे उनके होंठों की तपिश महसूस हुई तो मैंने उनके होंठों को चूसना शुरु कर दिया। मैंने पिछ्ले पाँच सालों में सेक्स की इतनी ज्यादा जानकारी इकट्ठा कर ली थी कि मैं पूरी तरह आश्वस्त था। मैंने थोड़ी देर तक उनके होंठ चूसे और फिर अपनी जीभ उनके मुँह में धकेल दी। फिर मैंने उनकी जीभ अपने मुँह में खींच ली और चूसने लगा। इस दौरान मेरे दोनों हाथ उनके पूरे जिस्म पे फिरते रहे- कभी उनके चूचुकों पे, कभी उनके चूतड़ों पे, पीठ पे, पेट पे और जांघों पे।
और उनके हाथ बस मेरी पीठ पे जमे हुए थे। फिर धीरे से मैंने अपनी गर्म साँस का अहसास उनकी गर्दन पर कराना शुरु किया। उनकी आँखें बन्द हो चुकी थीं और उनका एक हाथ मेरी पीठ छोड़ के मेरे बालों में पहुँचकर शरारत कर रहा था।
क़रीब आधा घन्टा यही चलता रहा। फिर मैंने उन्हें अपनी गोद में उठा लिया और चूमता हुआ उनके बेडरूम में ले गया और उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया।
मैंने अपने आप को उनके ऊपर डाल दिया और दोनों एक दूसरे को दीवानों की तरह चूमते रहे। इसी बीच उन्होंने मेरी शर्ट के सारे बटन खोल डाले। मैं उनसे अलग हुआ और अपनी शर्ट उतार फेंकी। फिर मैंने उनकी साड़ी भी उतार दी। अब वो सिर्फ़ ब्लाउज और पेटिकोट में थीं । एक बार फिर मैं उनके ऊपर चढ़ बैठा। इस बार मेरे होंठ उनके पूरे जिस्म पर फिरने लगे। ब्लाउज के ऊपर से ही उनके चूचुकों को मैंने इतना चूसा कि उनके दोनों सिरे गीले हो गये। मेरे हाथ उनकी जांघों पर घूम रहे थे। उनका पेटिकोट पूरा ऊपर आ चुका था। अचानक उन्होंने एक पलटी ली और मेरे ऊपर आ गई। अब उन्होंने मेरा पूरा चेहरा चूम-चूम कर गीला कर दिया और मेरे सीने को चूमने लगीं। अब तक उनका एक हाथ मेरी बेल्ट निकाल के मेरी जीन्स के बटन खोल चुका था और मेरी चड्डी के अन्दर घुस कर मेरे नाग को थाम चुका था।
अचानक वो मेरे ऊपर से उठीं और मेरे कमर के नीचे जाने लगीं। मैं उनका इरादा भाँप गया और उन्हें बीच में ही पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया। मैंने अपने होंठों को उनके होंठों से मिल दिया और उनके ब्लाउज के बटन खोल कर निकाल दिया। अब वो ब्रा और पेटीकोट में थी। मैंने उन्हें अपने नीचे दबा लिया और ब्रा के ऊपर से ही उनके चूचुकों को चूमने लगा। धीरे-धीरे नीचे आते हुए मैं उनके पेट को चूमने लगा और अपनी जीभ उनकी नाभि में डाल दी। अब मेरी जीभ तो शरारत कर ही रही थी और मेरे हाथ उनकी पेटिकोट का नाड़ा खोल रहे थे।
जल्दी ही मैंने उनका पेटिकोट भी उतार फेंका। अब वो मेरे सामने पड़ी हुई थीं सिर्फ़ सफ़ेद ब्रा और पैन्टी में। मैं कुछ देर के लिये उनसे अलग हुआ और उन्हें निहारने लगा।
उन्होनें अपनी आँखें खोली और मुस्कुरा कर कहा- क्या कर रहे हो जान?"
"अपनी जान के दिलकश हुस्न का नजारा कर रहा हूँ।" मैंने शरारत से मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
उनके चेहरे पर एक शर्म की लाली छा गई। मैंने उन्हें उठा कर अपनी गोद में बिठा लिया और उनकी ब्रा उतार फेंकी। अचानक वो मेरी गोद से उतर गई और नीचे बैठ के मेरी जीन्स निकाल दी और मेरी चड्डी भी उतार दी पर इससे पहले कि वो मेरा लिंग मुँह में लेती मैंने उनका चेहरा थाम लिया और कहा- ऐसे नहीं जान, मुझे भी मौका मिलना चाहिये ना।
वो धीरे से मुस्कुरा दीं। मैंने उन्हें वापस बिस्तर पर धकेल दिया। मैंने उनकी पैन्टी उतार दी और 69 की पोजिशन में आ गया। अब मेरा लिंग उनके मुँह में था और मेरी जीभ उनकी योनि में। वो मेरे लिंग को लॉलिपॉप की तरह चूस रही थीं, एक हाथ से मेरे अन्डकोश से खेल रही थीं और दूसरे हाथ को मेरे चूतड़ों पर फिरा रही थीं।
इधर मैं अपने दोनों हाथों से उनकी जांघों को सहला रहा था, उनकी योनि को चूम रहा था, चूस रहा था और बीच-बीच में धीरे से काट भी रहा था।
फिर मैंने अपनी जीभ उनकी योनि में घुसा दी और जी-स्पौट की तलाश करने लगा। 5 मिनट में ही मुझे वो 'जादुई बिन्दु' मिल गया। जैसे ही मेरी जीभ उससे छुई उनके मुँह से एक आनंद की "आह" निकल गई।
उन्होंने अपने मुँह से मेरा लिंग निकाल दिया और अपने नाखून मेरे चूतड़ों पर जमा दिये। मैं रुक गया तो वो मेरा इशारा समझ गई। फिर से मेरा लिंग उन्होने मुँह में ले लिया। मैंने भी अपनी जीभ वापस उनकी योनि में घुसा दी और जी-स्पौट को छेड़ने लगा।
हमारा खेल दस-पन्द्रह मिनट चला और यकायक दोनों एक दूसरे के मुँह में एक साथ ही झड़ गये। कुछ देर हम वैसे ही लेटे रहे। फिर मैं सीधा होकर उनकी बगल में लेट गया। वो हौले से उठीं और मेरे ऊपर आ गई। फिर से हमारे होंठ जुड़े और कुछ ही देर में अलग हो गये।
"मजा आ गया !" वो मुस्कुराते हुए बोलीं।
"अभी कहाँ? असली मजा तो अब आयेगा मेरी जान !" मैंने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
"तो इन्तज़ार किस बात का है? थक तो नहीं गये?" उन्होंने शरारत से पूछा।
"शेर कभी थकता नहीं !" इतना कह कर मैंने एक पलटी ली और उन्हें अपने नीचे दबा लिया।
अब उनका नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म के नीचे दबा हुआ था। मैंने अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिये और दोनों हाथ उनके स्तनों पर जमा दिये। चूचुकों को अपनी चुटकी से मसलता रहा, स्तनों को दबाता रहा-खेलता रहा और उनके होंठों को चूसता रहा। फिर मैं अपने होंठ उनकी गर्दन पर लाया और चूमने लगा। मस्ती से उनकी आँखें बन्द हो चुकी थीं। उनके हाथ कभी मेरी पीठ पर फिसल रहे थे तो कभी उनकी उँगलियॉ मेरे बालों में।
थोड़ा और नीचे आकर मैंने उनका एक स्तन मुँह में ले लिया और चूसने लगा। मेरा एक हाथ उनके दूसरे स्तन से खेल रहा था और दूसर हाथ उनकी जांघों और पेट पर फिर रहा था। अब मैंने अपनी उँगलियाँ उनकी योनि में डाल दीं और छेड़ने लगा। उनके मुँह से आनन्द भरी सिसकारियाँ निकलने लगीं।
यह खेल क़रीब आधा घन्टा चला। फिर उन्होने मुझे ऊपर खींच लिया और कहा- अब डाल दे जान। बर्दाश्त नहीं हो रहा।
मैंने हौले से उनके होंठ चूमे और कहा- तैय्यार हो जाओ जान जन्नत की सैर करने के लिये। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉंम पर पढ़ रहे हैं।
मैंने उन आसनों का प्रयोग करने का सोचा जो बहुत कम लोगों को पता है। पर फिर मैंने सोचा कि पहली बार में ही अपने सारे पत्ते खोलना ठीक नही। इसीलिये मैंने साधारण तरीके से ही करने का फ़ैसला किया।
मैं उनकी टांगों के पास बैठ गया और उन्हें चौड़ा कर दिया। फिर मैं अपने लिंग को उनकी जांघों पर और उनकी योनि पे रगड़ने लगा। उनकी आँखें बन्द हो चुकी थीं और मुँह से आह निकल रही थी। मैं अपना लिंग उनकी योनि के मुँह पर रगड़ता रहा और वो थरथराती रहीं।
आखिरकार जब उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भींच लिया और मेरे चेहरे पर हर जगह चूमने लगीं। मैं उनकी बेताबी समझ गया और उनके होंठों पे होंठ रख दिये। धीरे से मैं अपने लिंग को उनकी योनि में घुसाने लगा। जैसे ही मैंने पहला धक्का लगाया, मेरा लिंग उनकी योनि में आधा घुस गया। उनके मुँह से एक चीख निकल गई।
मैं रुक गया।
फिर उन्होंने मुझे चूमा तो मैंने एक और धक्का लगाया। इस बार मेरा पूरा लिंग उनकी योनि में चला गया। मैं उनके होंठों को चूसता रहा और धक्का लगाता रहा। मेरे हाथ उनके पूरे बदन पर घूम रहे थे और उनके हाथ मेरी पीठ पर।
"आआअह्ह्ह...आआह्ह्ह...अह हाह आअ ह्हह......" उनके मुँह से आवाज़ें निकलने लगीं।
अचानक उन्होंने अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा दिये और मुझे अपनी बाँहों में भर लिया। उनका निकल चुका था।
थोड़ी देर तक हम दोनो ऐसे ही लिपटे रहे और एक दूसरे को चूमते रहे, चूसते रहे। फिर उन्होंने कहा- तेरा तो अभी बाकी है ना, निकाल ले तू भी।
मैंने वापस अपनी जगह सम्भाल ली और धक्के लगाने लगा। 5 मिनट में मेरा भी काम हो गया।
दोनों एक दूसरे से लिपट गये और कितनी ही देर तक एक दूसरे को चूमते रहे।
"तू तो अब पूरा मर्द बन गया है रे !" थोड़ी देर बाद वो बोलीं।
"आपको मज़ा तो आया ना?" मैंने पूछा।
"मत पूछ रे ! मैं तो सातवें आसमान पर उड़ रही हूँ। तू कब तक है यहाँ? कुछ दिन और रहेगा न?"
"हूँ अभी तो काफ़ी दिन यहाँ। अगली बार आपको अपने स्पेशल, सीक्रेट मूव्ज का मज़ा दूँगा।"
"अगली बार कब? अभी कर ना।"
"नहीं, अभी मुझे जाना होगा। रात को आ जाऊँगा। आप तैयार रहना।"
फिर मैंने अपने कपड़े पहने और उन्हें चूम कर वापस घर आ गया।
दोस्तो ! आपको मेरी कहानी कैसी लगी? प्लीज मुझे मेल कीजियेगा अगर बुरी भी लगी हो।
अगली बार मैं आपको अपने दो स्पेशल, सीक्रेट मूव्ज बताऊँगा जिनसे मैंने आन्टी को रात भर मजा दिया।
तब तक के लिये विदा।


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