Delhi's hot aunty

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हि दूसतोन मेरा नाम सपरश है । मैन आपको मेरि मकान मालकिन से चुदाइ कि कहानि बतता हून। मैन उस समय 12थ मेन पधता था। मैन जिस मकान मेन रहता था, उसकि मकान मालकिन कि उमर करिब 36 थि। वोह एक बहुत हि सेक्सी औरत थि।मैन उनहे “औनती” कह कर बुलाता था। औनती का नाम था रोमा।मैन उनकि खूबसूरति का दीवना था। जब भि मौका मिलता था,मैन उनसे बात ज़रूर करता। इसि बहने मुझे उनके शरीर को निहारने का मौका मिलता था। मुझे औनती कि चुचियान को देख कर पागल हो जाता था। उनकि चुचियान बहुत बदि-बदि थि।
सरी के अनचल से उनकि एक झलक मिल जाये, येहि सोच कर मैन उनसे जब भि मौका मिले तब उनसे बात करता था। बातोन के बीच मेन उनके बदे सिज़े के चुचियोन को देखता रहता। धीरे-धीरे येह बात शायद औनती को भि पता चल गयी थी कि मैन उनके चुचियोन को घूरता रहता हून। वोह भि अब कभि-कभि अपने पल्लु को गिरा देति और लोव-सुत बलौसे से गोल-गोल चुचियन दिख जाति। सबसे अछि बात ये थि कि औनती सेक्सी तरिके से कपदे पहनति थि। जैसे कि पारदरशि लोव-सुत बलौसे।पारदरशि बलौसे से उनकि बरा भि साफ़ दिखति थि। सरि भि नाभि से काफ़ि नीचे हुअ करति थि। मैन उनके अनग-अनग का दीवना था। उनके रसीले होनथ, मद-मसत कर देने वले चुचियान,नाभि, गानद सब कुछ। वोह मेरि रातोन कि रानि थि। मैन जब भि हसत-मैथुन करता था,केवल उनहि के बारे मेन सोचता था।
मैन लुसकी था कि मुझे रोमा औनती के घर मेन रहने का सौभगया परपत हुअ। उनके पति जब ओफ़्फ़िसे चले जाते थे तब वोह घर पर अकेले हुअ करति थि। ऐसे मेन जब मैन उनसे मुलाकत हो जाति तब मैन मौके का फ़ैदा उथा कर काफ़ि देर बातेन करता था। है! कया जवनि चायि थि। 36 का होने के बवजूद वोह सेक्स-बोमब थि।
एक बार मेरे माता-पिता दुस दिन के लिये हमारे एक करिबि रिशतेदार के घर दुसरे शहर गये हुए थे। चुनकि मुझे खाना बनना नहिन आता था इसिलिये औनती ने कहा कि मैन उनहि के घर खाना खा लिया करुन। मैन बहुत खुश था। ऐसा मौका कौन गवना चहेगा? मैन 8 बजे उनके घर जाता था और खना खाने के बाद वापस अपने कमरे मेन चला अता था। उस वकत तक उनसले भि घर पर हि होते थे। दो दिन बाद, उनसले के सोमपनी ने उनको मीतिनग के लिये मुमबै भेज दिया। अब औनती अकेले हो गयी थि। रात को रोज़ कि तरह मैन 8 बजे औनती के घर पहुनचा। औनती ने दरवाज़ा खोला। हर बार कि तरह वोह सेक्सी लोव सुत बलौसे और सरि मेन थि।
लोव-सुत मेन से मैन उनके खूबसूरत चुचियोन को निहार रहा था। वोह जब मुद कर जाति, तो मैन उनके पारदरशि बलौसे से उनकि कालि बरा और पीथ को देखता। उफ़्फ़! कया जिसम था। मन करता था कि उनहे पकद लून और पुरे बदन को बारि-बारि से चूमुन। उनकि गानद भि भरि-पूरि थि। मैन सोचता था कि ऐसे गानद को मारने मेन कितना मज़ा आयेगा। पर आज तक मैने किसि लदकि को नहिन चोदा था इसिलिये इन सब बतोन को केवल सोचता हि था।
औनती काफ़ि खुश नज़र आ रहि थि। शायद, उनको भि मेरे दिल कि तम्मन्ना का पता चल गया था। वोह भि मेरे साथ बैथ कर खाना खाने लगि। खाना खाते-खाते उनका पल्लु गिर गया। उनकि बदि-बदि चुचियान दिखने लगि और मैन एक तक हो कर उनको देखता रहा। औनती को भि मज़ा आ रहा था। उनहोने पल्लु को गिरा हि छोद दिया। फिर कहने लगि,” येह सरि भि बहुत परेशान करति है। जी करता है कि इसे उतार दून। एक तो इतनि ज़यादा गरमि उपर से येह सरि”। कहते हुए उनहेने सरि निकल दिया। अब वोह सिरफ़ पेत्तिसोअत और बलौसे मेन थि। हमेशा कि तरह पेत्तिसोअत नाभि से काफ़ि नीचे थि। औनती अब मेरे पर ज़ुलम धा रहि थि। उनका अध-ननगा जिसम मेरे आनखोन के सामने था। औनती अब दोबारा खाने बैथ गयी। खन्ना खा लेने के बाद वोह बोलि,”सपरश मुझे रात को अकेले दर्र लगता है। जब तक तुमहरे उनसले नहिन आ जाते तुम मेरे घर रात को रुक जाया करो”।
मैन मन हि मन खुशि से झूम उथा। मैन अपनि किताबेन औनती के घर ले आया। मैन सोच रहा था कि मुझे दूसरे कमरे मेन सोना होगा और इसिलिये किताबेन औनती के रूम मेन ना रख कर बगल वले कमरे मेन रख दिया। तब औनती ने कहा, “कयोन सपरश, मेरे साथ सोने मेन तुमहे कोइ आपत्ति है? तुम मेरे साथ हि सो जाओ ना। तुम पधाइ करना और मैन वहिन सो जऊनगि। जब तुमहारा जि चहे तुम भि वहिन सो जाना।” मैन औनती के बगल मेन सोने के खयल से पागल हो रहा था। आजतक जिस्से केवल बात कि थि आज उनके साथ सोने का मौका मिल रहा था।
गरमि बहुत ज़यदा थि इसिलिये औनती ने कहा,” सपरश तुम अपनि शिरत उतार दो। इतनि गरमि मेन केवल पनत मेन भि रह सकते हो। मैन तो सोते वकत बलौसे भि नहिन पहनति। केवल बरा और पेत्तिसोअत हि पहनति हून”। औनती के मुनह से ‘बरा’ जैसे शबद सुन कर मैन रोमनचित हो गया। फिर कया था,वोह अपना बलौसे खोलने लगि। जैसे-जैसे एक-एक हूक खोलति जाति उनके उभरे हुइ चुचियान दिखति जाति। आखिर मेन उनहोने बलौसे खोल दिया औ उसे एक ओर फेक दिया। ज़ालिम औनती कि चुचियान कालि बरा मेन कसि हुइ थि। मन कर रहा था कि उनके चुचियोन को मसल दून और झीभ से चातुन। पर मुझे सययम बनये रखना था।
फिर जैसे तैसे मैने पधै मेन धयान लगना शुरु किया। थोदि देर बाद औनती बोलि,” सपरश, मेरे कमर मेन दरद है, अगर तुम बुरा ना मनो तो इसकि मालिश कर दो।” येह बात सुन कर मेरा लुनद खरा होने लगा। मैने लुनद को थीक किया और औनती के करिब पहुनच गया। औनती बोलि,”बुरा मत मनना,तुमसे मालिश करवा रहिन हून। कया करेन दरद इतना ज़यदा हो गया है”। मैने कहा,”इसमेन बुरा मनने आलि कया बात है,आपको जो काम हो करवा लिजिये। मुझे कोइ ऐत्राज़ नहिन है”।
फिर कया था मैने औनती के कमर कि मालिश शुरु कर दि। उनके मखन कि तरह कोमल बदन पर मेरे हाथ फिरने लगे। मेरा लुनद खरा होने लगा। मेरे औनती के शरिर को हाथ लगाते हि वोह बोलि,” है! कितना अच्चहा लग रहा है। मेरे बदन कि थकन जैसे कि तुमने खतम कर दि।”फिर वोह बोलि,” थोदा और नीच दबाना। मेरि पेत्तिसोअत उतार दो, इस्से तुमहे मालिश करने मेन असानि होगि और मुझे भि आरम मिलेगा।” मुझे अपने कानोन पर विशवास नहिन हो रहा था। इसिलिये मैने कुछ नहिन किया। इसपर औनती बोलि,” सोच कया रहे हो, पेत्तिसोअत उतार दो।” ऐसा सुनते हि मैने पेत्तिसोअत का नादा खीनच दिया और उसे नीसे सरका दिया।
अब औनती के गोरे और गोल-गोल गानद मेरे आनखोन के सामने थि। मैने उनके गानद के पास मालिश शुरु कर दि। मैन उनकि गानद को धीरे-धीरे मसल रहा था। औनती भि सिसकारि ले रहि थि। उनहे भि मज़ा आ रहा था। फिर वोह बोलि,” ज़रा ज़ोर से मसलो ना। दरद बहुत ज़यदा है। आज तुमहे हि मेरे जिसम के दरद को खतम करना है”। मैने ज़ोर-ज़ोर से मसलने शुरु कर दिया। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मेरा लुनद उनके पैर मेन रगर रहा था। औनती बोलि,” येह कया है मेरे पैरोन के पास? ” मैने कहा,” येह मेरे लुनद है”। इस पर औनती ने कहा,” अपना लुनद नहि दिखओगे अपनि औनती को? मैन भि तो देखून कि मेरे बुनती का लुनद कैसा है।” ऐसा कहते हुए वोह उथ गयी। चुनकि औनती ने पनती नहिन पहना था इसिलिये उनकि चूत उनके झनतोन के बीच से दिखै दे रहि थि।
औनती ने मेरा पनत खोल दिया। अब मैन केवल उनदेरवेअर मेन था। फिर उनहोने मेरे उनदेरवेअर का एलसतिस पकदा और उसे भि नीचे कर दिया। मेरा लुनद पूरि तरह से खरा था। मेरे खरे लुनद को देखकर औनती बोलि,”बाप रे! कितना बदा लुनद है तुमहारा। येह तो एक दुम खरा है। अपनि औनती के जिसम को देखकर तुम भि बेताब हो गये कया? कयोन बुनती किसि लदकि को कभि चोदा है? इस 9” के लुनद का कया फ़ायदा अगर इसे इसतमाल हि ना किया हो।” ऐसा कहते हि औनती उसे अपने मसत होथोन से चूम लिया। मेरे शरीर मेन एक बिजली सि दौद गयी।फिर औनती ने धीरे से कहा,” कया तुम मुझे चोदोगे? इस लुनद का इसतेमाल होना चहिये ना। ऐसे लुनद को देख कर मेरि जवनि भदक उथि है। आज सारि रात हुम-लोग चोदते हुए बितयेनगे। बोलो चोदोगे ना अपनि औनती को?”।
औनती कि बात सुन कर मैन खुशि से झूम उथा। मैने घबरते हुए कहा,” क्ककयोन नहिन”। इस पर औनती बोलि,”आज कि रात मेरि जवनि तुमहरे नाम हुइ बुनती,जितना चहे मज़े ले लो। मैन कुछ नहिन बोलुनगि।”
फिर औनती उथ खदि हुइ।वोह सिरफ़ काले बरा मेन मेरे समने खदि थि। अधननगा जिसम,सुदोवल शरिर,मदमसत चुत,खूबसूरत चुचियन और रसीले होनथ। येह सब आज रात मेरे थे। मेरि तो जैसे लोत्तेरी लग गयि थि। औनती बोलि,” आजा बुनती, मेरे पास आ और मेरि बरा खोल कर मुझे ननगा कर दे। आज कि रात हमारे बीच कोइ दूरि ना रहे”। मैन उनकि ओरे बधा और वोह घूम गयि। मैन उनसे बिलकुल चिपका हुअ था। मैन कानपते हुए हाथोन से बरा का हूक एक-एक कर के खोल दिया। इसके बाद मैने औनती के कनधे से बरा के सत्रपस को नीचे कर दिये और बरा को फेक दिया। अब औनती पूरि तरह ननगि थि। फिर मैने औनती को बेद पर लिता दिया और उनके रसीले होथोन को अपने होथोन के बीच दबा कर ज़ोर-ज़ोर से चुसने लगा। इस्से औनती भि जोश मेन आ गयि और उलता उनहोने मुझे नीचे कर दिया और मेरे उपर चध गयी और मेरे होथोन को चुसने लगि।
औनती अपना जीभ मेरे मुनह मेन दाल दिया और अनदर चतने लगि।हुम दोनो एक दूसरे के मुनह को अपने जीभ से चुसे रहे थे। कया रसीले होथ थे औनती के। ऐसा लग रहा था कि हुम लोग एक-दूसरे के होथोन के रस को चुसे दलेनगे।औनती के बाल मेरे चेहरे पर बिखरे हुए थे और वोह मेरे मुनह को अपने जीभ से चुसे जा रहि थि।
इसके बाद मैने उनके चुचियोन को मसलना शुरु किया। किने मुलयम चुचियान थि औनती कि। सालि ने कया जिसम पाया था। ऐसे जिसम को तो मन करता है कि चोदता हि रहुन। मैन अपने दोनो हाथोन से औनती के चुचियोन को मसल रहा था। औनती आवेश मेन आ गयि और बोलि,” मेरे रजा और ज़ोर से मसलो। जितना मसलोगे उतनहि मज़ा आयेगा। ले लो इनको अपने मुनह मेन। पी लो इनका रस”। ऐसा कहते हुए औनती ने मेरे सर को पकद कर अपने चुचियोन से दबा दिया। मैने भि उनके चुचियोन को मुनह मेन ले लिया और चप-चप कि अवाज़ से चुसना शुरु कर दिया। अने जीभ से उनके निद्दलेस को चाता। उनके निप्पलेस खदे थे। औनती सिसकियन लेने लगि और सिसकियोन कि अवाज़ कमरे मेन भर गयि। औनती के सिसकियोन कि अवाज़ से महौल और गरम हो रहा था। वोह बोलने लगि,” एक-एक करके दोनो को चुसे लो। मेरि चुचियान तुमहरे होथोन के लिये तरस रहि है।
आज खुश कर दो अपनि औनती को।” और फिर मैन और ज़ोर-ज़ोर चुसने लगा। बीच-बीच मेन अपने दातोन से उनहे दबा भि देता था और औनती बोल उथति,”बदा ज़ालिम है तु।पर सच पूचो तो ऐसे दातोन के बीच जब तुम मेरे सुचियोन को दबाते हो तो मेरि वासना उर भदक उथति है। अब मुझसे नहिन रहा जयेगा। चल बुनती अब मेरि चुत चोदने को तययर हो जा”।
येह बोल कर औनती ने अपने तानगे फ़ैला दि और चित हो गयि। उनहोने मेरा लुनद पकदा और उसके उपर से चमदि को नीचे कर दिया और बोलि,” चल बुनती घुसा दे अपने लौदे को मेरि चुत मेन और घपा-घुप मेरि चुत मरना शुरु कर दे”। एक हाथ से औनती ने मेरे लुनद को पकदा और फिर घुसा दिया अपनि चुत मेन। औनती दरद से करह उथि।”ऊऊफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ माआआईईईइन्नन्न मर गयि। इतना मोता लुनद घुसवा कर मेरा बुर फत जायेगा। सच बुनती तु बदा ज़ालिम है। तुने मुझे खुश कर दिया। ज़रा सोच एक 18 साल का लदका एक 36 साल कि औरत को चोद रहा है। इतने छोते उमर मेन कया लुनद पाया है तुने। मेरि जवानि तुमहारि गुलम हो गयि है। बुस आज से दुस दिन और दुस रातेन केवल चुदाइ होगि। तुझसे इतना चुदवौनगि कि मेरि चुत फत जाये”।
अब मैन धक्के दे-दे कर औनती कि चुत को चोदने लगा। औनती भि गानद उथा-उथा कर धक्के मार रहि थि। हुम दोनो एक जिसम हो गये थे। कभि मैन औनती के उपर होता तो कभि औनती मेरे को नीचे कर देति। वोह मुझे चूमे जा रहि थि। जोश मेन वोह कानप रहि थि।हुम जिस बेद पर चुदै कर रहे थे वोह भि अब एज़ि से हिल रहा था। सारे कमरे मेन बेद कि चुन-चुन कि अवाज़ और मेरे और औनती के सिसकरियोन कि अवाज़ गूनज रहि थि। हुम दोनो चुदै मेन मसत थे। घपा-घुप मैन उनकि चुत मार रहा था। घरशन से कुच तकलीफ़ भि हो रहि थि। औनती ने मेरा लुनद अपनि चुत से निकल लिया और फिर उसे मुनह मेन लेकर अपने जीभ से चात कर अपना थूक लगा दिया। अब औनती बोलि,” ले बुनती,तेरे लौदे पे मैने अपना थूक लगा दिया अब चोदने मेन और मज़ा आयेगा। अब तुमहारा लुनद असानि से अनदर-बाहर हो जयेगा। चल फिर से शुरु हो जा,चोद दो मुझे,फाद दो मेरि चुत”। मैने अपना लुनद फिर से औनती के चूत मेन घुसा दिया,सि बार वोह असानि से घुस गया।
फिर से शुरु हो गयि मेरि और औनती कि चुदाइ। अब हुम और जोश मेन आगये थे। औनती गानद उथा-उथा कर धक्के दे रहि थि। इसके बाद उनहोने मुझे नीचे कर दिया और खुद उपर हो गयि। औनती और मैन वासना के आग मेन जल रहे थे। मेरा लुनद औनती के चूत मेन घुसा हुअ था और औनती अपने गानद को उपर-नीचे कर रहि थि और सिसकरियान ले रहि थि। “है बुनती तेरा लुनद और मेरि चुत अब ऐसे हि मज़ा करेगि। पधाइ को तु कुछ दिनोन के लिये भूल जा। ऐसा मौका बार-बार नहि आयेगा।” जब औनती मेरे उपर चध करमुजसे चुदवा रहि थि तो हमरे ज़ोरदार झतके से उनकि चुचियान उछल रहि थि। वाह! कया नज़रा था। मैने कहा,” जानति हो औनती, मैन जब भि हसत-मैथुन करता था तो आपके बारे मेन हि सोचता था। आप मेरे रातोन कि रानि थि। आज मेरा सपना सच हो गया है। पधै तो बाद मेन भि हो जायेगि पर ऐसा मौका नहिन मिल पायेगा। दुस दिनोन तक मैन अपनि सारि दिल कि तम्मना पूरि करुनगा, बोलो दोगि ना मेरा साथ?” इस पर औनती बोलि,”मेरे जानेमन, येह चुत तुमहारे लुनद कि दीवनि हो गयि है। तुम जैसे चहो वैसे मुझे चोदो”।
ऐसा कह कर हुम दोनो चुदाइ करते रहे। पलनग बुरि तरह से हिल रहा था,औनती मुझे अपने दातोन से धीरे-धीरे कात भि रहि थि।”औनती लगता है मेरा पानि झरने वाला है”,मैने कहा। पर औनती धयन दिये बिना घुप-घुप चुदवा रहि थि। आखिर मेन मेरा पानि झर गया। अब तक औनती का भि पानि झर गया। मैने अपना लुनद औनती के चुत से निकाल लिया और हुम दोनो चित हो गये।हुम-दोनो बहुत खुश थे।
थोदि देर बाद हमारि वासना फिर से जाग उथि। औनती बोलि,” बुनती,थोदा नीचे हो जाओ”। मैन समझ नहि पा रहा था कि औनती नीचे होने को कयोन कह रहि हैन। फिर औनती ने मेरा लुनद चुसना शुरु कर दिया। मैन मसति मेन आ गया। वोह बोलि,”कैसा लग रहा है लुनद चुसवना? जी चहता है कि तुमहरे लुनद को इसि तरह चुसति रहून।” उनके नाज़ुक होनथ और जीभ मेरे लुनद का मज़ा ले रहे थे। “चोद रजा, मेरे मुनह को चोद दे।” और मैने औनती के सर को पकद लिया और अपने लुनद को अनदर-बाहर करने लगा। थोदि देर मेन औनती इतना गरम हो गयि कि वोह ज़ोर-ज़ोर से मेरे लुनद को चतने लगि और धक्के दे-दे कर मुनह मेन लुनद लेने लगि।
थोदि देर मेन मैन फिर से झर गया और मेरा लौदे का पानि औनती के मुनह मेन चला गया। औनती ने उसे पि लिया। औनती वासना कि आग मेन जल रहि थि। उनहोने मुझे पलत दिया और गानद के छेद को भि चातने लगि, फिर बोलि,”चल बुनती मैन तुझे चुत का सवद चखति हून।आज तुझसे मैन अपनि चुत चतवौनगि”।
औनती ने अपनि तानगे फ़ैला दि और मैने उनकि चुत को चातना शुरु कर दिया। कया खुशबू थि औनती कि चुत कि। मैने उनके झानतोन को जीभ से चातना शुरु कर दिया। औनती कि झानतेन गीलि हो गयी। फिर मैने अपने जीभ को उनके चुत मेन घुसा दिया और अनदर चातने लगा। औनती को बहुत मज़ा आ रहा था। मैने अपने जीभ से औनती की ग-सपोत को चातना शुरु कर दिया। ग-सपोत पर जैसे हि मेरे जीभ लगे,औनती के बदन मेन बिजलि सि दौद गयि। वोह बोल पदि,” वह बुतनी, तु बहुत तेज़ है।औरत के सबसे उत्तेजित करने वाले हिस्से को तुमने छु दिया है। चात-चात और चात। मेरा पानि झरने वाला है। अपने मुनह को करीब ला, सारा चुत-रस तुमहारे मुनह मेन दे दून”। औनती झर गयी और मैने उनका चुत-रस पि लिया।
रात भर कि चुदाइ से वकत बीतने का पता नहिन चला और सुबह के 7:00 बज गये। रात के 11:30 को शुरु हुइ चुदाइ सुबह के 7:00 बजे तक चलति रहि। औनती मुजसे दिल खोलकर चुदति रहि और मैने भि अपने दिल कि भदस निकाल दि।फिर औनती ने कहा,”चलो थोदे देर के लिये हुमेन चुदाइ को रोकना होगा कयोनकि अभि दूधवाला और कामवालि आति होगि। उनके जाने के बाद काम-करीदा दोबरा शुरु करेनगे। आज तो दिन मेन भि तुमसे चुदवौनगि। मेरे जानु,तुमने मुझे अपने लौदे का नशा दाल दिया है। अब तो मेरि चुत फरक रहि है”। मैने कहा,” मेरि रानि,अगर इतनि हि आग है तो चलो फिर शुरु हो जायेन”। औनती बोलि,”अभि नहिन पर यकीन करो 9:00 बजे के बाद जब कोइ नहिन आयेगा तो तुमहे दोबरा मज़ा दूनगि।”
जब 9:00 बजे के बाद सारे लोग चले गये तो औनती कमरे मेन आयि। उनहोने पारदरशि निघती पहन रखा था। अनदर कुछ भि नहिन, इसिलिये चुत,गानद और चुचियान साफ़ दिख रहि थि। मैन तो ननगा बिसतर पर लेता था। औनती ने मेरा लुनद पकद लिया और चुसने-चातने लगि। फिर बोलि,” चलो बुनती,दोनो साथ नहाते हैन। मैन तुनहारे बदा को रगरुनगि और तुम मेरे जिसम को रगरना”। ऐस कहकर उनहोने अपना निघती खोल दिया। फिर हुम दोनो बथरूम मेन घुस गये। शोवेर चालु करके हुमने नहाना शुरु किया। साबुन लेकर मैने औनती के मखमलि बदन मेन लगाना शुरु किया। उनगलि को चुत मेन दाल दिया और उनगलि से चुत चोदने लगा।
औनती उत्तेजित हो गयी। उनहोने मुझे ज़मीन पर गिरा दिया और मेरे लुनद को पकर कर अपने चुत मेन दाल दिया।मैन बथरूम मेन औनती को चोदने लगा। मैं ज़ोरदार धक्के दे रहा थाउर औनती गानद उथा कर और तेज़ धक्के दे रहि थि। औनती बहुत हि हवसि थि। वासना कि आग मेन हुम दोनो जल रहे थे। ऐसा लग रहा था कि 10 रात और 10 दिन केवल चुदाइ मेन बीत जायेगि। हमरि चुदाइ थोदे देर मेन खतम तो हो गयि पर 15 मिनुते बाद फिर से शुरु हो गयी। हुम-लोग 24 घनते में 12 


1 comments:

admin on 10 March 2015 at 01:48 said...



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